Monday, October 18, 2010

आज भी...

कुछ अनकहे सवाल कुछ अनकहे जवाब है आज भी...
एक अधूरी कहानी , एक बंद किताब है आज भी ...
क्यूँ है दिल में इतनी कसक ...
कोई अपना नहीं फिर भी किसे खोने का डर है आज भी...




टूट जाते है सभी रिश्ते मगर दिल से दिल का रिश्ता अपनी जगह
दिल को है तुझ से ना मिलने का यकीन
"तुझ से मिलने कि दुआ अपनी जगह...."




कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर दुनियां हम लुटा दें 
हर एक ने दिया धोखा , किस किस को भुला दें ,
अपने दिल का दर्द दिल ही में दबाये रखते हैं ...
करदें जो बयां तो सारी महफ़िल को रुला दें ...!!!

Tuesday, September 28, 2010

unknown

यही वफ़ा का सिलसिला है तो कोई बात नहीं ,
दर्द ये तुमने दिया है तो कोई बात नहीं ,
यही बहुत है कि तुम देखते हो साहिल से
कश्ती डूब रही है तो कोई बात नहीं I
रखा था अरमानो दिल में छुपा कर तुमको,
वो घर तुमने छोड़ दिया है तो कोई बात नहीं,
तुमने ही आइना - ए - दिल मेरा बनाया था,
तुम्ही ने तोड़ दिया है तो कोई बात नहीं ,
किसे मज़ाल कहे कोई मुझको "बदनाम "
पर अगर ये तुमने कहा है तो कोई बात नहीं...
यही वफ़ा का सिलसिला है तो कोई बात नहीं ,
दर्द ये तुमने दिया है तो कोई बात नहीं 

Monday, September 27, 2010

ख़ुशी कि इन्तेहाँ

जाने किस किस मोड़ पर ले आती है जिंदगी ...
इतना हंसा भी ना पाई है जितना रुलाती है जिंदगी ...


जिंदगी के खलीपन कि सजा किसको सुनाये ?
हमें अपनी ही अदालत में खींच लाती है जिंदगी ...


जब भी समेटा है खुद को , कि सँवारे इसे हम 
रुख हवाओं का बदल बदल कर बहाती है जिंदगी ...


आज फिर से टूटा है मेरा घरौंदा बनते बनते 
और वो देखो कैसे गुमसुम गुमनाम सी चली जाती है जिंदगी ...!!!




"बहुत रोता है ये दिल उस एक आंसू कि खातिर जो निकल आता है ख़ुशी कि इन्तेहाँ होने पर ..."


...Namiके दिल से 

कमाल कर दिया आपने

वो जिंदगी में आये..और 
मैने अपनी जिंदगी खुली किताब सी बिछा दी उनके सामने ...
ताकि कोई शिकवा गिला ना रह जाये...


उन्होंने मेरी जिंदगी कि किताब को पढ़ा और अपने हिसाब से किताब के पन्ने फाड़ने लगे...
वो पन्ने जो उन्हें पसंद नहीं आये.. वो पन्ने जिनसे मेरी जिंदगी जुडी थी और उनकी नफरत 


जब उन पन्नों को मेरी जिंदगी से अलग नहीं कर पाए तो उन्होंने 
मेरी जिंदगी कि किताब के पोस्टर छपवा कर बाज़ार में लगा दिए ...


सबको ये बताने को कि मेरी इतनी फटी हुई जिंदगी को भी वो अपनाने को तैयार है
और एक मै हूँ जो उनको अपना नहीं समझती ...तभी तो 
मेरी जिंदगी कि किताब के पन्नों को फाड़ने का हक मैने उन्हें नहीं दिया !!!


कमाल कर दिया आपने ....


"मैंने आज़ाद किया अपनी वफाओं से तुझे , बेवफाई कि सजा मुझको सुना दी जाये ... 
मैंने मांगी थी उजाले कि फ़क़त एक किरण ...तुम से ये किस ने कहा आग लगा दी जाये "

....नमिता 

Saturday, September 11, 2010

समझ ज़रा

किसने कहा वो हमे नहीं समझते .....?????
ये और बात है कि जितना समझते है गलत समझते है....!!!!




मुझे पता था आप मुझे कितना समझते है ...पर फिर भी  दिल संभाला हुआ था ...
आज आपने मुझे एहसास कराया आप मुझे क्या समझते है ....इस बार दिल टूटने से नहीं संभल पाई ...!!!

...नमिता 

Tuesday, August 10, 2010

ख्वाहिश

दिए तो होते उन्होंने अपने गम ...हमने कहाँ खुशियों कि ख्वाहिश की थी ...
कुछ पल ठहर तो जाते संग मेरे ... मैने कब उम्र बिताने कि गुजारिश कि थी ...


एक आवाज लगा दे तु ,

लौट आने का मन है !

बस इशारा ही चाहिए ,

फ़िर से दिल लगाने का मन है !!

खो चुकी हैं जो यादें,

रेत उन पर से हटाने का मन है !

आज फ़िर से सुबह की पहली किरण के संग उठ जाने का मन है,

बहुत हुआ इन्तहां,

आज फ़िर इस पुराने दिल को आजमाने का मन है !

बस दे दो एक इशारा ,

फ़िर से दिल लगाने का मन है..........

खो चुकी थी जो आरजू,

फ़िर से उन्हें सपने बनने का मन है !

जुस्तजू जगी है निभाने को वादे ,

जो किए थे हमने कभी ,

उन वादों की खातिर ही ,

एक इशारा दे - दे ..

फ़िर से दिल लगाने का मन है ...

एक आवाज लगा दे तुं ,

लौट जाने का मन है !

बस इशारा ही चाहिए ,

फ़िर से दिल लगाने का मन है-....
फ़िर से दिल लगाने का मन है-....

Monday, August 9, 2010

कोशिश ...

मैं तमाम कोशिशों के बावजूद हार गयी ...
वो उसे मिल गाया जिसने उसे माँगा ही नहीं ..
हर एक से पुछा उसके ना मिलने का सबब
हर एक ने कहा वो तेरे लिए बना ही नहीं ...